आजकल काफी दवाइयों में स्टेरॉयड आ रहा है आप प्रथम दृष्टि में कैसे जान सकते है कि इसमें स्टेरॉयड मिला है कि नहीं,
बल्कि लोगो को रातों रात ठीक करने वाली आर्युवेदिक दवाइयां भी इनसे अछूती नहीं रही ।
किसी दवा में स्टेरॉयड (Steroid) है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए लैब टेस्ट ही एकमात्र प्रामाणिक तरीका है। हालांकि, दवा के पैकेट की जानकारी, लक्षणों और कुछ बुनियादी बातों पर ध्यान देकर भी काफी हद तक इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
1. दवा के नाम और सॉल्ट (Composition) से पहचानें
अंग्रेजी (Allopathic) दवाओं के स्ट्रिप या डिब्बी के पीछे लिखे सामग्री (Salt/Composition) को पढ़ें। जिन सॉल्ट के नाम के अंत में ये शब्द आते हैं, वे आमतौर पर स्टेरॉयड होते हैं:
–sone: Betamethasone, Dexamethasone, Prednisone, Hydrocortisone
–lone: Prednisolone, Triamcinolone, Deflazacort
–onide: Budesonide, Fluocinolone
–asone: Mometasone, Fluticasone
cort: Cortisone
2. मिलावटी (आयुर्वेदिक/यूनानी/देसी) दवाओं के लक्षण
कुछ असंसाधित या अनधिकृत दवा निर्माता तेजी से राहत देने के लिए दर्द निवारक, वजन बढ़ाने या स्किन क्रीम में अवैध रूप से स्टेरॉयड मिला देते हैं। इन संकेतों पर ध्यान दें:
अचानक और चमत्कारिक आराम: यदि कोई पुरानी बीमारी (जैसे गठिया, अस्थमा, त्वचा रोग या पुराना दर्द) दवा लेते ही 24 से 48 घंटे के भीतर पूरी तरह गायब हो जाए, तो उसमें स्टेरॉयड होने की बहुत अधिक संभावना होती है।
दवा बंद करते ही बीमारी का कई गुना बढ़ना (Withdrawal Effect): दवा छोड़ते ही दर्द, सूजन या दाने पहले से भी अधिक गंभीर रूप से वापस आ जाना।
बिना लेबल या खुली पुड़िया/कैप्सूल: अगर दवा किसी सादे लिफाफे, पुड़िया या बिना ब्रांड/मान्यता (FDA/AYUSH) के कैप्सूल में दी जा रही है।
अचानक वजन बढ़ना या चेहरे पर सूजन: दवा शुरू करने के कुछ ही दिनों में चेहरे पर सूजन (Moon Face), पेट के पास मोटापा या भूख अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाना।
3. लैब टेस्ट (लैबोरेट्री जांच)
यदि आपको किसी आयुर्वेदिक पाउडर, पुड़िया या सिरप पर संदेह है, तो घर पर इसे निश्चित रूप से जांचने का कोई घरेलू तरीका नहीं होता।
इसे NABL प्रमाणित ड्रग टेस्टिंग लैब (Drug Testing Laboratory) या गवर्नमेंट एनालिस्ट लैब में भेजकर Thin Layer Chromatography (TLC) या HPLC टेस्ट करवाया जा सकता है।
आवश्यक सावधानियां
अचानक दवा बंद न करें: यदि आप लंबे समय से स्टेरॉयड वाली दवा ले रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह के बिना उसे अचानक बंद न करें। इसे धीरे-धीरे (Tapering) कम किया जाता है, वरना शरीर को नुकसान पहुंच सकता है।
पंजीकृत डॉक्टर की सलाह लें: बिना डॉक्टर के पर्चे के मेडिकल स्टोर से डायरेक्ट 'स्टेरॉयड क्रीम' या 'पेनकिलर' न खरीदें।
स्टेरॉयड के क्या साइड इफेक्ट है
स्टेरॉयड के साइड इफेक्ट्स इस बात पर निर्भर करते हैं कि वे किस प्रकार के हैं (मेडिकल कॉर्टिकोस्टेरॉयड या एनाबॉलिक बॉडीबिल्डिंग स्टेरॉयड), वे किस मात्रा में लिए जा रहे हैं और कितने समय तक इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
निचे दिया गया डायग्राम शरीर के अलग-अलग अंगों पर कॉर्टिकोस्टेरॉयड दवाओं के लंबे समय तक उपयोग से होने वाले प्रभाव को दर्शाता है:
1. मेडिकल स्टेरॉयड (Corticosteroids) के साइड इफेक्ट्स
ये दवाएं अस्थमा, गठिया, एलर्जी या ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज के लिए दी जाती हैं (जैसे Dexamethasone, Prednisolone)।
कम समय के इस्तेमाल पर:
भूख अधिक लगना और वजन बढ़ना
चिड़चिड़ापन, घबराहट या मूड बदलना
पेट में जलन या एसिडिटी
नींद आने में परेशानी
लंबे समय या उच्च खुराक के इस्तेमाल पर:
मजबूत हड्डियों का कमजोर होना: ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) और हड्डियों के फ्रैक्चर का खतरा बढ़ना।
इम्युनिटी कमजोर होना: शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे बार-बार इंफेक्शन होता है।
ब्लड शुगर और बीपी बढ़ना: डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा।
चेहरे पर सूजन (Moon Face): चेहरे और गर्दन के पीछे चर्बी जमा होना।
त्वचा की समस्याएं: त्वचा का पतला होना, आसानी से खरोंच लगना और मुहासे होना।
आंखों पर असर: मोतियाबिंद (Cataract) या ग्लूकोमा होना।
2. एनाबॉलिक स्टेरॉयड (Anabolic Steroids) के साइड इफेक्ट्स
इनका उपयोग कुछ लोग गैर-कानूनी तरीके से मांसपेशियों को तेजी से बढ़ाने (बॉडीबिल्डिंग) के लिए करते हैं। इनके दुष्प्रभाव काफी गंभीर हो सकते हैं:
पुरुषों में: शुक्राणुओं की संख्या में कमी, नपुंसकता, टेस्टिकल्स का छोटा होना और स्तनों का बढ़ना (Gynecomastia)।
महिलाओं में: आवाज का भारी होना, चेहरे पर अत्यधिक बाल आना, पीरियड्स का अनियमित होना।
हृदय और लिवर: लिवर डैमेज, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा अत्यधिक बढ़ जाना।
मानसिक प्रभाव: अत्यधिक आक्रामकता ('Roid Rage'), डिप्रेशन और स्वभाव में हिंसक बदलाव।
जरूरी बात
डॉक्टर की सलाह से ली जा रही स्टेरॉयड दवाओं को अचानक कभी बंद न करें। इसे हमेशा डॉक्टर के बताए अनुसार धीरे-धीरे (Tapering) कम किया जाता है, ताकि शरीर का प्राकृतिक हार्मोनल संतुलन बना रहे।
स्टेरॉयड दवाओं (Corticosteroids) को धीरे-धीरे कम करके बंद करने की प्रक्रिया को स्टेरॉयड टेपरिंग (Steroid Tapering) कहा जाता है।
जब आप 2-3 सप्ताह से अधिक समय तक स्टेरॉयड लेते हैं, तो शरीर की एड्रेनल ग्रंथियां (Adrenal Glands) प्राकृतिक स्टेरॉयड (कॉर्टिसोल) बनाना अस्थायी रूप से कम या बंद कर देती हैं। यदि दवा अचानक बंद कर दी जाए, तो शरीर में कॉर्टिसोल की भारी कमी हो जाती है, जिससे जीवन के लिए खतरनाक स्थितियां (Adrenal Crisis) पैदा हो सकती हैं।
टेपरिंग का सही तरीका और चरण
टेपरिंग का कोई universal नियम नहीं है; यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कितने दिनों तक और कितनी मात्रा (Dose) में दवा ली है। डॉक्टर आमतौर पर खुराक को धीरे-धीरे घटाते हैं ताकि शरीर की एड्रेनल ग्रंथियां दोबारा काम करना शुरू कर सकें।
एक सामान्य उदाहरण (उदाहरण के लिए Prednisone 10mg):
सप्ताह 1: रोजाना 40 mg
सप्ताह 2: रोजाना 30 mg
सप्ताह 3: रोजाना 20 mg
सप्ताह 4: रोजाना 10 mg
सप्ताह 5: रोजाना 5 mg फिर पूरी तरह बंद।
(नोट: यह केवल एक उदाहरण है। आपकी सही खुराक और समय सीमा केवल आपका डॉक्टर ही निर्धारित कर सकता है।)
टेपरिंग के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
खुराक खुद से कम या ज्यादा न करें: केवल डॉक्टर द्वारा दिए गए टेपरिंग शेड्यूल का सख्ती से पालन करें।
दवा लेने का समय: स्टेरॉयड की खुराक सुबह के समय लेना सबसे बेहतर माना जाता है, क्योंकि शरीर प्राकृतिक रूप से भी सुबह ही सबसे ज्यादा कॉर्टिसोल बनाता है।
सकारात्मक रिकवरी पर ध्यान दें: जैसे-जैसे खुराक कम होगी, शरीर प्राकृतिक रूप से संतुलित होना शुरू हो जाएगा।
अचानक बंद करने पर होने वाले लक्षण (Steroid Withdrawal Symptoms)
यदि टेपरिंग सही ढंग से न की जाए या दवा अचानक रोक दी जाए, तो ये लक्षण दिख सकते हैं:
अत्यधिक थकान और कमजोरी
जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द
चक्कर आना या ब्लड प्रेशर अचानक गिरना
उल्टी, मिचली या भूख न लगना
मूल बीमारी के लक्षणों का तेजी से वापस आ जाना











